Grow Bags में ये गलतियाँ मत करना, पौधे बर्बाद हो जाएंगे

Grow Bags में ये गलतियाँ मत करना, पौधे बर्बाद हो जाएंगे

Grow bags घर पर लगाना आसान लगता है। लेकिन ज़्यादातर लोग शुरुआत में कुछ ऐसी गलतियाँ करते हैं जिनकी वजह से पौधे या तो बढ़ते नहीं या फिर जल्दी मर जाते हैं। ये गलतियाँ बड़ी नहीं हैं पर इन्हें जानना ज़रूरी है की ऐसा क्यों होता है ।


गलत साइज़ का grow bag चुनना

हर पौधे को अलग जगह चाहिए जैसा की टमाटर को कम से कम 15–20 लीटर का bag चाहिए और धनिया या पुदीना 5 लीटर में भी ठीक रहता है। अगर छोटे bag में बड़ा पौधा लगाया तो जड़ें फैल नहीं पाएंगी और पौधा बढ़ना रुक जाएगा।

एक आम गलती यह है कि लोग एक ही साइज़ के Grow bags सब पौधों के लिए खरीद लेते हैं। मिर्च, बैंगन, टमाटर, खीरा, इन सबकी ज़रूरत अलग-अलग इस लिए सब की size अलग अलग होती है।

सब्ज़ी और Grow bag साइज़ का एक सीधा हिसाब:

  • धनिया, पुदीना, मेथी: 5 लीटर
  • मिर्च, बैंगन: 10–12 लीटर
  • टमाटर, खीरा, करेला: 15–20 लीटर
  • कद्दू, लौकी: 25–30 लीटर

मिट्टी में सिर्फ बगीचे की मिट्टी डालना

यह सबसे ज़्यादा होने वाली गलती है। बगीचे की सीधी मिट्टी grow bag में डालने पर वो पानी पड़ते ही बहुत काल्डी हो जाती है जिस से जड़ें सांस नहीं ले पातीं और पौधा पीला पड़ने लगता है।

Grow bag के लिए मिट्टी हल्की और भुरभुरी होनी चाहिए।

एक अच्छा मिश्रण यह है: 40% सामान्य मिट्टी, 40% गोबर की खाद या compost, और 20% कोकोपीट। कोकोपीट मिट्टी को हल्का रखता है और पानी सही से निकलने देता है। यह किसी भी नर्सरी पर 50–80 रुपये में मिल जाता है।


पानी का गलत अंदाज़ा

पानी से संबधित दो तरह की गलतियाँ होती हैं। एक, रोज़ पानी देना चाहे ज़रूरत हो या नहीं और दूसरी, 2–3 दिन छोड़ देना।

Grow bags में पानी ज़मीन के गमलों से जल्दी सूखता है क्योंकि इनके चारों तरफ से हवा लगती है। गर्मियों में रोज़ पानी देना ठीक है, पर सर्दियों में हर 2 दिन में एक बार काफी है।

पानी देने का सही तरीका यह है: उँगली मिट्टी में 1 इंच अंदर डालें। अगर मिट्टी नम लगे तो पानी मत दें। अगर सूखी लगे तो दें।

ज़्यादा पानी से जड़ें सड़ती हैं और कम पानी से पत्तियाँ मुरझाती हैं। दोनों में पौधा कमज़ोर होता है।


Drainage holes का ध्यान न रखना

अच्छे grow bags में नीचे छेद होते हैं ताकि पानी रुके नहीं। लेकिन कई बार bag को किसी plate या tray पर रख देते हैं और पानी उसी में जमा होता रहता है। पौधे की जड़ें उस पानी में डूबी रहती हैं और 4–5 दिन में सड़ने लगती हैं।

Grow bag को हमेशा थोड़ा ऊँचा रखें। नीचे 2–3 छोटे पत्थर रख सकती हैं ताकि पानी बाहर निकल सके। अगर tray इस्तेमाल करती हैं तो उसमें जमा पानी हर बार खाली करें।


धूप का गलत अनुमान

Grow bags को balcony या छत पर रखने का फायदा यह है कि आप इन्हें धूप के हिसाब से हिला सकती हैं। पर बहुत से लोग एक जगह रख देती हैं और वहाँ से हटाती नहीं।

ज़्यादातर सब्ज़ियों को रोज़ कम से कम 5–6 घंटे सीधी धूप चाहिए। पुदीना और धनिया 3–4 घंटे में भी ठीक रहते हैं। अगर bag ऐसी जगह है जहाँ दिन में 2 घंटे से कम धूप आती है तो कोई भी सब्ज़ी अच्छे से नहीं उगेगी।

गर्मियों में दोपहर की तेज़ धूप से नाज़ुक पौधे जल सकते हैं। उन्हें दोपहर 12 से 3 बजे के बीच छाँव में रखें।


बीज बहुत गहरा या बहुत उथला बोना

बीज बोते समय गहराई का ध्यान रखना ज़रूरी है। टमाटर, मिर्च के बीज ज़्यादा से ज़्यादा आधा सेंटीमीटर गहरे बोएं। धनिया के बीज को हल्का दबाकर ऊपर से थोड़ी मिट्टी डालें।

बहुत गहरा बोने से बीज अंकुरित ही नहीं होता। बहुत उथला बोने से पानी डालते समय बीज बह जाता है।

बीज बोने के बाद ऊपर से पानी तेज़ मत डालें। हाथ से हल्का छिड़कें या spray bottle इस्तेमाल करें।


एक bag में बहुत सारे पौधे लगाना

10 लीटर के bag में 4–5 टमाटर के पौधे लगा दिए, यह गलती बहुत होती है। शुरुआत में सब ठीक लगता है, पर 3–4 हफ्तों में पौधे एक-दूसरे से जगह और खाना छीनने लगते हैं और सब कमज़ोर हो जाते हैं।

एक 15 लीटर bag में सिर्फ 1 टमाटर या 1 बैंगन का पौधा लगाएं। धनिया और पुदीना को 5 लीटर bag में 8–10 बीज काफी हैं।


खाद देना भूल जाना

Grow bag में मिट्टी सीमित है। पौधा जैसे-जैसे बढ़ता है, मिट्टी के पोषक तत्व खत्म होते जाते हैं। ज़मीन में लगे पौधे को नीचे से नए पोषक तत्व मिलते रहते हैं, पर bag में नहीं।

हर 15–20 दिन में एक बार खाद देना ज़रूरी है। घर पर बनी compost या गोबर की खाद सबसे अच्छी है। अगर बाज़ार से लेना हो तो liquid fertilizer आता है जो 100–150 रुपये में मिलता है, उसे पानी में घोलकर डाल सकती हैं।

एक चम्मच सरसों की खली को रात भर पानी में भिगोकर सुबह वो पानी पौधे को देना भी अच्छा काम करता है।


Bag को कभी न बदलना

Grow bag हमेशा के लिए नहीं होता। Fabric bags 2–3 साल में खराब होने लगते हैं। मिट्टी भी हर साल बदलनी चाहिए क्योंकि पुरानी मिट्टी में पोषक तत्व और हवा दोनों कम हो जाते हैं।

हर साल एक बार पुरानी मिट्टी निकालें, उसमें compost मिलाएं और वापस डालें। अगर bag बहुत पुराना हो गया है और उसमें छेद हो गए हैं तो नया लें।


मौसम के हिसाब से पौधे न लगाना

यह गलती बहुत आम है। जनवरी में टमाटर लगा दिए, जून में पालक लगा दिया। ये दोनों अपने मौसम में नहीं हैं।

भारत में सब्ज़ियों का सीधा हिसाब:

  • गर्मी (मार्च–जून): लौकी, करेला, खीरा, भिंडी
  • बरसात (जुलाई–सितंबर): लौकी, तोरई, अरबी
  • सर्दी (अक्टूबर–फरवरी): टमाटर, मिर्च, पालक, मेथी, धनिया, मटर

मौसम के बाहर लगाया पौधा बीमार ज़्यादा पड़ता है और फल कम देता है।


पौधे को ध्यान से न देखना

रोज़ 2 मिनट पौधे के पास खड़े होकर देखें। पत्तियों का रंग बता देता है कि पौधे को क्या चाहिए।

  • पत्तियाँ पीली हों: खाद कम है या पानी ज़्यादा है
  • पत्तियाँ मुड़ी हुई हों: पानी कम है
  • पत्तियों पर सफेद या भूरे धब्बे हों: कोई बीमारी या कीड़ा है
  • पत्तियाँ नीचे लटकी हों: धूप बहुत तेज़ है या पानी नहीं है

शुरुआत में पकड़ में आए तो ठीक करना आसान है। 10 दिन बाद पकड़ में आए तो पौधा बचाना मुश्किल हो जाता है।


Grow bags में Gardening करना कोई मुश्किल नहीं है। ये गलतियाँ एक बार समझ आ जाएं तो दोबारा नहीं होतीं। सही मिट्टी, सही पानी, सही धूप, और थोड़ा ध्यान, बस इतने में घर पर ताज़ी सब्ज़ियाँ उगती हैं।

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